भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में बड़ा फैसला लिया है। आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।
वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है।आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं महंगाई यानी मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया गया है।
आम जनता पर असर
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सीधा मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य बैंक ऋणों की ईएमआई में बदलाव की संभावना कम है। यानी जिन लोगों ने फ्लोटिंग रेट पर लोन लिया है, उनकी मासिक किस्त फिलहाल पहले जैसी ही रहने की उम्मीद है।
आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष प्रमुख व्यापारिक मार्गों को प्रभावित कर रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। ऐसे हालात में सतर्क मौद्रिक नीति अपनाना जरूरी है।
गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी से दिसंबर 2025 के बीच आरबीआई ने रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी। इसके बाद फरवरी, अप्रैल, जून और अब अगस्त 2026 की समीक्षा में रेपो रेट को लगातार स्थिर रखा गया है।
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