दीपोत्सव का एक दशक, अयोध्या के गौरव का नया अध्याय

2017 में 1.71 लाख दीयों से शुरू हुआ दीपोत्सव, दस वर्षों में विश्वपटल पर स्थापित हुई रामनगरी की नई पहचान

भरत के त्याग से समझाया सत्ता का अर्थ, अधिकार नहीं बल्कि दायित्व है शासन का वास्तविक आधार

आस्था से अर्थव्यवस्था को मिल रही गति, कुम्हारों, पुष्प विक्रेताओं और होटल कारोबारियों के लिए बढ़े अवसर

जहां प्रकाश है वहां सुरक्षा, सुरक्षा से निवेश और निवेश से विकास व रोजगार: मुख्यमंत्री योगी

वंचित परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां बांटने और स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने की अपील

02 नवंबर, लखनऊ। अयोध्या का दीपोत्सव अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 2017 में शुरू हुआ यह आयोजन दस वर्षों की यात्रा में रामनगरी के सांस्कृतिक गौरव और सनातन परंपरा की वैश्विक पहचान बन चुका है। दीपोत्सव ने न केवल अयोध्या को विश्वपटल पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी गति दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सात नवंबर को होने वाले दीपोत्सव से पहले ‘योगी की पाती’ के माध्यम से प्रदेशवासियों को संदेश दिया है। उन्होंने लोगों को परिवार और मित्रों के साथ अयोध्या पहुंचकर आयोजन का साक्षी बनने का निमंत्रण दिया है।

मुख्यमंत्री ने ‘योगी की पाती’ में लिखा कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति से जुड़ा दीपोत्सव अंधकार से प्रकाश, निराशा से आशा और आस्था से विकास की यात्रा का प्रतीक है। यह केवल दीप प्रज्वलन का आयोजन नहीं, बल्कि सनातन चेतना के पुनर्जागरण और भारत के सांस्कृतिक गौरव का महापर्व है। दीप की छोटी सी लौ भी गहन अंधकार में नई आशा जगाने का संदेश देती है।

दीपोत्सव ने दी उत्सव प्रदेश की पहचान
मुख्यमंत्री योगी ने पत्र में आस्था और अर्थव्यवस्था के संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि आस्था और जनभागीदारी को विकास की शक्ति बनाकर उत्तर प्रदेश ने ‘उत्सव प्रदेश’ के रूप में नई पहचान स्थापित की है। जहां प्रकाश है, वहां सुरक्षा का वास है। जहां सुरक्षा है, वहां निवेश के अवसर हैं। निवेश से विकास होता है और विकास से रोजगार तथा सुख-समृद्धि आती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपोत्सव से स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल रहा है। कुम्हारों के बनाए दीयों की मांग बढ़ रही है। पुष्प विक्रेताओं, होटल व्यवसायियों और अन्य स्थानीय व्यापारियों के लिए आय तथा रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इस प्रकार सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।

भरत के त्याग से दिया शासन का संदेश
मुख्यमंत्री ने रामायण के प्रेरक प्रसंग के माध्यम से सत्ता और शासन के आदर्शों का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि प्रभु श्रीराम के वनवास के दौरान भरत ने 14 वर्षों तक राजसुख का त्याग किया। श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर प्रतिष्ठित रखकर अयोध्या का शासन संचालित किया।

मुख्यमंत्री के अनुसार यह प्रसंग सिखाता है कि सत्ता का वास्तविक अर्थ अधिकार नहीं, बल्कि दायित्व है। अयोध्या का दीपोत्सव त्याग, मर्यादा और समर्पण की इसी भावना को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित कर रहा है। यह आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के साथ जीवन मूल्यों से भी जुड़ने का अवसर देता है।

सरयू तट पर दीपमालाएं, आकाश में ड्रोन की छटा
सात नवंबर को होने वाले दीपोत्सव में सरयू तट और राम की पैड़ी पर भव्य दीपमालाएं सजाई जाएंगी। पारंपरिक दीपों के साथ आधुनिक ड्रोन प्रस्तुतियां और कलाकारों की सहभागिता आयोजन को भव्य बनाएगी।

मुख्यमंत्री ने पत्र में सरयू तट की दीपमालाओं का वर्णन करते हुए लिखा कि राम की पैड़ी पर लाखों दीपों की जगमगाहट से ऐसा प्रतीत होता है, मानो अयोध्या में स्वयं आकाशगंगा उतर आई हो। उन्होंने इस आयोजन को परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम के रूप में प्रस्तुत किया है।

वंचित परिवारों के घर भी रोशन करने की अपील
मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेशवासियों से त्योहार की खुशियां जरूरतमंद परिवारों के साथ बांटने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आसपास कोई वंचित परिवार हो तो अपने सामर्थ्य के अनुसार उसे दीये, मिठाइयां और नए वस्त्र भेंट कर उसकी दीपावली भी आलोकित करें। यही दीपोत्सव की सच्ची भावना है।

उन्होंने स्थानीय कारीगरों के बनाए दीप और अन्य उत्पाद खरीदकर उनके परिश्रम को प्रोत्साहन देने की अपील भी की। युवाओं से सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने, नकारात्मकता से दूर रहने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने को कहा। मुख्यमंत्री ने लिखा कि स्वच्छता में ही श्री अर्थात लक्ष्मी जी का वास है।

दीपोत्सव के नाम लगातार दर्ज होते रहे विश्व कीर्तिमान
अयोध्या में वर्ष 2017 में पहली बार 1.71 लाख दीयों से दीपोत्सव की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2018 में 3.01 लाख, 2019 में 4.04 लाख और 2020 में कोरोना प्रतिबंधों के बीच 6.06 लाख दीये जलाए गए।

वर्ष 2021 में 9,41,551 दीयों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। इसके बाद वर्ष 2022 में 15,76,955 और 2023 में 22.23 लाख दीयों से नए कीर्तिमान स्थापित हुए। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद वर्ष 2024 के पहले दीपोत्सव में 25.12 लाख दीये प्रज्वलित किए गए।

वर्ष 2025 में 26.17 लाख दीयों से पिछला रिकॉर्ड तोड़ा गया। इसी आयोजन में 2,128 लोगों ने एक साथ आरती कर एक और विश्व कीर्तिमान बनाया। इस तरह दस वर्षों में दीपोत्सव ने अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *