लखनऊ, 03 अक्टूबर 2026 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ द्वारा 4 अक्टूबर 2026 की रात आकाश प्रेमियों एवं आमजन के लिए विशेष रात्रि आकाश दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर शनि ग्रह प्रतियुति की स्थिति में होगा। कार्यक्रम के माध्यम से आमजन एवं विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखने और उनके बारे में वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।प्रतियुति के दौरान पृथ्वी सूर्य और शनि के बीच स्थित होती है। इस स्थिति में शनि सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में दिखाई देता है और लगभग पूरी रात इसके अवलोकन का अवसर मिलता है। 4 अक्टूबर को शनि लगभग +0.3 मैग्नीट्यूड की चमक के साथ दिखाई देगा। इसे नंगी आंखों से भी चमकीले तारे जैसे पिंड के रूप में पहचाना जा सकेगा। वहीं, दूरबीन एवं टेलीस्कोप के माध्यम से शनि के प्रसिद्ध छल्लों का अद्भुत दृश्य देखा जा सकेगा। प्रतियुति के आसपास शनि के छल्लों की चमक में होने वाली वृद्धि को सीलीगर प्रभाव कहा जाता है।अक्टूबर के पहले सप्ताह में आकाश प्रेमियों को कई अन्य आकर्षक खगोलीय घटनाओं को देखने का अवसर भी मिलेगा। 4 अक्टूबर की रात से 5 अक्टूबर की भोर तक पूर्वी आकाश में चंद्रमा के साथ कैस्टर एवं पोलक्स तारे तथा मंगल ग्रह दिखाई देंगे। इसके बाद 6 अक्टूबर की भोर में पतला चंद्रमा चमकीले बृहस्पति ग्रह के अत्यंत निकट दिखाई देगा। इस प्रकार अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में आकाश में होने वाली विभिन्न खगोलीय घटनाएं आमजन के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।खगोल विज्ञान में प्रतियुति ग्रहों के अवलोकन के लिए एक महत्वपूर्ण स्थिति होती है। 4 अक्टूबर को शनि के प्रतियुति में होने के कारण यह सूर्यास्त के आसपास पूर्वी आकाश में उदित होकर रातभर दिखाई देगा तथा मध्यरात्रि के आसपास आकाश में काफी ऊंचाई पर पहुंच जाएगा।इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला द्वारा स्थापित एवं स्थापित की जा रही दूरबीनों के माध्यम से आगंतुकों को शनि ग्रह सहित अन्य खगोलीय पिंडों का अवलोकन कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त 4 अक्टूबर को नक्षत्रशाला में आमजन के लिए सूर्य दर्शन कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। सूर्य दर्शन के दौरान विशेष सौर फिल्टर युक्त उपकरणों के माध्यम से सूर्य का सुरक्षित अवलोकन कराया जाएगा।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित खगोल वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों द्वारा जनसामान्य की खगोल विज्ञान से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान भी किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला द्वारा संचालित एस्ट्रोनॉमर्स क्लब के माध्यम से किया जाएगा। इसके जरिए आमजन और विद्यार्थियों को खगोलीय घटनाओं को केवल देखने का ही नहीं, बल्कि उनके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझने का भी अवसर मिलेगा।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश के निदेशक श्री रमेश चंद्र ने कहा कि परिषद द्वारा आने वाले समय में लखनऊ के विभिन्न स्थानों पर खगोलीय आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं आमजन में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।