भारत के उपराष्ट्रपति, सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तेलंगाना के कान्हा शांति वनम में आयोजित ‘विश्व ध्यान दिवस’ समारोह में भाग लिया और मन की शांति, भावनात्मक कल्याण तथा सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में ध्यान की शाश्वत प्रासंगिकता पर विशेष बल दिया।
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान एक सार्वभौमिक पद्धति है जो सांस्कृतिक, भौगोलिक और धार्मिक सीमाओं से परे है। उन्होंने इसे मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक स्थिरता और आंतरिक परिवर्तन के मार्ग के रूप में वर्णित किया और इस बात पर जोर दिया कि ‘विश्व ध्यान दिवस’ आधुनिक जीवन में चिंतन के बढ़ते महत्व को पहचानने का एक अवसर देता है।